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एक्टीव और पैसिव (सक्रिय और निष्क्रिय) दोनों प्रकार के धूम्रपान लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के जोखिम कारक हैं। 2020 ग्लोबोकॅन के आंकड़ों के अनुसार, भारतीयों में लंग्ज (फेफड़ों का) कैंसर चौथा सबसे आम कैंसर है।
लंग्ज (फेफड़ों) में सेल्स (कोशिकाओं) के अनियंत्रित विभाजन से लंग्ज (फेफड़ों का) कैंसर होता है। लंग्ज (फेफड़ों) में ट्यूमर का निर्माण श्वास सहित विभिन्न फुफ्फुसीय कार्यों को प्रभावित करता है।
लंग्ज (फेफड़े का) कैंसर सबसे आम कैंसर है जो दुनिया भर में मौत का कारण बनता है। 2020 ग्लोबोकॅन के आंकड़ों के अनुसार, भारतीयों में लंग्ज (फेफड़ों का) कैंसर चौथा सबसे आम कैंसर है।
धूम्रपान करने वाले लोगों में लंग्ज (फेफड़े का) कैंसर अधिक आम है, हालांकि यह धूम्रपान न करने वालों को भी हो सकता है। पैसिव स्मोकिंग या सेकेंड हैंड स्मोकिंग भी लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के लिए एक जोखिम कारक है।
धूम्रपान छोड़ने से लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
माइक्रोस्कोप (सूक्ष्मदर्शी) के नीचे दिखाई देने वाले घातक सेल्स (कोशिकाओं) के आकार के आधार पर, लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के दो प्राथमिक रूप होते हैं :
लंग्ज (फेफड़े) के कैंसर के अधिकांश मामले एनएससीएलसी के होते हैं। यह लंग्ज (फेफड़ों का) कैंसर तुलनात्मक रूप से धीमी गति से बढ़ता है। एनएससीएलसी के उपप्रकार निम्नलिखित हैं
एडेनोकार्सिनोमा एक प्रकार का कैंसर है जो बलगम पैदा करने वाली सेल्स (कोशिकाओं) में विकसित होता है जो एअर सैक (वायु थैली) के अस्तर में मौजूद होते हैं।
स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (एससीसी) एक प्रकार का कैंसर है जो वायुमार्ग की परत में मौजूद स्क्वैमस सेल्स (कोशिकाओं) में विकसित होता है।
लार्ज सेल कार्सिनोमा लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर का एक प्रकार है जो लंग्ज (फेफड़ों) के किसी भी हिस्से में बड़ी सेल्स (कोशिकाओं) में विकसित होता है।
एससीएलसी एक प्रकार का लंग्ज (फेफड़ों का) कैंसर है जो धूम्रपान करने वालों में अधिक आक्रामक और अधिक आम होता है। यह आस-पास के अंगों में तेजी से फैलता है। यह दिखने में ओट के दानों के समान होने के कारण इस कैंसर को ओट सेल कैंसर के नाम से भी जाना जाता है। एससीएलसी का निदान अक्सर उन्नत चरणों में किया जाता है।
प्रारंभिक अवस्था में, लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के कोई बड़े लक्षण नहीं दिखाई दे सकते हैं। यह एक्स-रे स्कैन से भी छूट सकता है। इसलिए, अधिक जोखिम वाले लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे सांस लेने और छाती के क्षेत्र से संबंधित किसी भी असुविधाओं पर ध्यान दें। लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर से जुड़े प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं :
वैज्ञानिकों ने कुछ जोखिम कारकों की पहचान की है जो लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के विकास से जुड़े हुए हैं, और वे हैं :
लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के 80 - 90 प्रतिशत मामलों के लिए धूम्रपान को जिम्मेदार बताया जाता है। निष्क्रिय धूम्रपान, जिसे अक्सर सेकेंड हैंड धूम्रपान के रूप में जाना जाता है, यह तब होता है जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की सिगरेट से निकला धुआं सांस-व्दारा खींच लेता है। यह धूम्रपान न करने वालों में लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर का एक प्रमुख कारण है। जो लोग धूम्रपान करने वाले लोगों के साथ रहते हैं उनमें 20 - 30% अधिक जोखिम होता है, जबकि धूम्रपान न करने वाले लोंगों में जो लोग धुएं के संपर्क में नहीं आते उनकी तुलना में जो लोग सेकेंड हैड धुएं के संपर्क में आते है उनको 16 -19 % अधिक जोखिम होता है।
रेडॉन गैस जो इमारतों विशेष रूप से बेसमेंट और अन्य निचले इलाकों में जमा हो जाती है, लंबे समय तक उसके संपर्क में रहने से लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
एस्बेस्टस, आर्सेनिक, डीजल के धुआं, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, क्रोमियम, सिलिका और अन्य खतरनाक रसायनों और प्रदूषकों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
जिन लोगों का लंग्ज (फेफड़े) के कैंसर का पारिवारिक इतिहास होता है उन लोगों में इस बीमारी के विकसित होने की संभावना अधिक होती है।
जिन लोगों का पहले लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर का इलाज हो चुका है, उनमें फिर से लंग्ज (फेफड़े के) कैंसर के विकसित होने का जोखिम अधिक होता है।
कैंसर से बचे जिन लोगों ने छाती के लिए रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) प्राप्त की है उनमें लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के विकसित होने की संभावना अधिक होती है।
लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर का पता लगाने और निदान करने के लिए कई परीक्षण विधियाँ उपलब्ध हैं:
प्रारंभ में, लक्षणों के कारण को समझने के लिए एक शारीरिक परीक्षण और चिकित्सा इतिहास का अच्छी तरह से मूल्यांकन किया जाता है। यदि किसी असामान्यता का संदेह होता है, तो अतिरिक्त परीक्षणों की सिफारिश की जा सकती है।
यदि असामान्य लम्प या गांठ का संदेह हो तो छाती के एक्स-रे स्कैन की सिफारिश की जा सकती है। लंग्ज (फेफड़ों) का सीटी स्कैन छोटे से छोटे घावों की पहचान कर सकता है जो एक्स-रे में दिखाई नहीं देते हैं।
यदि किसी मरीज़ को बलगम वाली खांसी होती है, तो लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) की उपस्थिति की जांच के लिए इसे इकठ्ठा किया जा सकता है और एक माइक्रोस्कोप के तहत इसकी जांच की जा सकती है।
बायोप्सी के दौरान, असामान्य गांठ से ऊतक का नमूना इकठ्ठा किया जाता है, और माइक्रोस्कोप के तहत इसकी जांच कि जाती है। बायोप्सी नमूना इकठ्ठा करने के लिए ऐसे कई तरीके उपलब्ध हैं जिनका उपयोग डॉक्टर करते हैं।
ब्रोंकोस्कोपी के दौरान, डॉक्टर ब्रोन्कोस्कोप नामक एक विशेष ट्यूब का उपयोग करके लंग्ज (फेफड़ों) के असामान्य क्षेत्रों की जांच करते हैं। इस ट्यूब में एक प्रकाश स्रोत और एक कैमरा होता है। इस प्रक्रिया के दौरान बायोप्सी नमूने इकठ्ठा करने के लिए विशेष उपकरण भी डाले जा सकते हैं। ऐसे में लिए गए नमूने को आगे की जांच के लिए भेजा जाता है।
इस प्रक्रिया में लिम्फ नोड्स से ऊतक के नमूने लेने के लिए गर्दन के नीचे एक चीरा लगाना और ब्रेस्ट्बोन (उरोस्थि) के पीछे सर्जिकल उपकरण डालना शामिल है।
नीडल बायोप्सी के दौरान, डॉक्टर एक्स-रे या सीटी छवियों की मदद से असामान्य सेल्स (कोशिकाओं) को इकट्ठा करने के लिए छाती की दीवार के माध्यम से और लंग्ज (फेफड़ों) के ऊतकों में एक सुई प्रशासित करते हैं। अगले चरण में, रोग की सीमा या चरण को निर्धारित करने के लिए पेट / सीटी स्कैन की सिफारिश की जा सकती है। पेट / सीटी, एमआरआई स्कैन आदि जैसे इमेजिंग परीक्षणों का उपयोग बीमारी के स्टेजिंग, उपचार योजना और चिकित्सा निगरानी में किया जाता है।
लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के लिए रोग का चरण, ट्यूमर का सटीक आकार और स्थान, मरीज़ की उम्र और मरीज़ की कुल स्वास्थ्य स्थिति जैसे कई महत्वपूर्ण कारकों पर विचार करके उपचार योजना तैयार की जाती है । लंग्ज (फेफड़े ) के कैंसर के लिए उपलब्ध मुख्य उपचार विकल्पों में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा), कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा) शामिल हैं।
सर्जरी के दौरान, सर्जन ट्यूमर के आसपास मौजूद स्वस्थ ऊतकों के एक छोटे से हिस्से के साथ ट्यूमर को निकाल देता है। रोग के चरण के आधार पर, बीमारी के उचित प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए कई सर्जिकल (शल्य चिकित्सा) प्रक्रियाएं हैं जिसे डॉक्टर चुनते हैं
प्रारंभिक चरण के लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के लिए वेज रिसेक्शन की सिफारिश की जाती है, जहां स्वस्थ ऊतक के मार्जिन के साथ लंग्ज (फेफड़े) के केवल ट्यूमर युक्त हिस्से को निकाल दिया जाता है।
सेगमेंटल रिसेक्शन लंग्ज (फेफड़े) के एक बड़े हिस्से को निकाल देता है; हालाँकि, यह प्रक्रिया पूरे लोब को नहीं निकालती है।
लोबेक्टोमी लंग्ज (फेफड़े ) के ट्यूमर प्रभावित पूरे लोब को निकाल देती है।
यह प्रक्रिया पूरे लंग्ज (फेफड़े ) को आपरेट करने और निकालने के लिए की जाती है। यदि कैंसर आस पास के लिम्फ नोड्स में फैल गया है, तो इन लिम्फ नोड्स को भी निकाला जा सकता है। सर्जरी के साथ-साथ कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) या दोनों की सर्जरी से पहले या सर्जरी के बाद में सिफारिश की जा सकती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी कैंसर सेल्स (कोशिकाएं) नष्ट हो गई हैं। सर्जरी से पहले, ये उपचार ट्यूमर के आकार को कम करने में मदद कर सकते हैं, जिससे सर्जरी आसान हो जाती है।
कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने के लिए, रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) एक्स-रे और प्रोटॉन जैसे स्रोतों से अधिक शक्तिशाली एनर्जी बीम का उपयोग करती है। स्थानीय रूप से उन्नत लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के मरीज़ों के लिए सर्जरी से पहले या बाद में रेडिएशन (विकिरण) दिया जा सकता है। बेहतर नैदानिक परिणामों के लिए अक्सर इसका उपयोग कीमोथेरेपी के संयोजन में किया जाता है। यदि सर्जरी उपचार विकल्प नहीं है, तो दिया जाने वाला प्राथमिक उपचार कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) का संयोजन हो सकता है। रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) उन्नत चरण के लंग्ज (फेफड़ों का) कैंसर जो अन्य अंगों में फैल गया है, उन मामलों में दर्द जैसे लक्षणों को कम करने में भी मदद कर सकती है ।
कीमोथेरेपी एक ऐसा उपचार है जो कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को मारने के लिए प्रभावशाली दवाओं का उपयोग करता है। कीमोथेरेपी दवाओं को नसों के द्वारा (आपकी बांह में एक नस के माध्यम से) दिया जा सकता है या मौखिक रूप से लिया जा सकता है। बेहतर उपचार परिणामों के लिए कीमोथेरेपी का उपयोग रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) के संयोजन में किया जा सकता है। इसका उपयोग सर्जरी से पहले ट्यूमर को सिकोड़ने और निकालने में आसान बनाने के लिए भी किया जा सकता है। अंत में, उन्नत चरण के लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर वाले मरीजों में दर्द और अन्य लक्षणों के इलाज के लिए केमोथेरेपी का उपयोग किया जा सकता है।
टार्गेटेड मेडिकेशन (लक्षित उपचार) कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) से जुड़ी विशिष्ट कमजोरियों को लक्षित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। टार्गेटेड मेडिकेशन (लक्षित उपचार) इन असामान्यताओं को रोककर कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को मार सकते हैं। लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के जिन मामलों में रोग उन्नत चरणों में चला गया हो, और मरीज़ अन्य उपचार विधियों को प्रतिक्रिया नहीं दे रहा हो उन मामलों में टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा) की सिफारिश की जाती है।
इम्यूनोथेरेपी एक प्रकार का कैंसर उपचार है जो मरीज़ की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर से लड़ने के लिए उत्तेजित करता है। चूंकि कैंसर सेल्स (कोशिकाएं) ऐसा प्रोटीन बनाती हैं जो उन्हें प्रतिरक्षा प्रणाली की सेल्स (कोशिकाओं) से छिपाने में सहायता करता हैं, इसलिए मरीज़ की प्रतिरक्षा प्रणाली कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को पहचानने और उन पर हमला करने में विफल रहती है। इम्यूनोथेरेपी प्रतिरक्षा प्रणाली की प्राकृतिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करती है और प्रतिरक्षा सेल्स (कोशिकाओं) से कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) पर हमला करवाती है। टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा) की तरह, जो मरीज़ उन्नत चरण के लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर से पीड़ित होते है उन मरीज़ों को अक्सर इम्यूनोथेरेपी की सिफारिश की जाती है ।
हां, लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर का इलाज किया जा सकता है। आज हमारे पास उपचार के कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से हम बीमारी का सफलतापूर्वक इलाज सुनिश्चित कर सकते हैं और मरीज़ को सामान्य और रोग मुक्त जीवन जीने में मदद कर सकते हैं।
जितनी जल्दी लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर का पता चलता है, जीवित रहने की दर और समग्र नैदानिक परिणाम उतना ही बेहतर होता है। ऐसा होने के लिए, कोई भी श्वास या लंग्ज (फेफड़ों) से संबंधित लक्षण जो 2 सप्ताह से अधिक समय तक रहता है उसके बारे में सावधान रहना महत्वपूर्ण है - कोई भी लक्षण जो परेशान करता है उसके लिए जितनी जल्दी हो सके चिकित्सक से परामर्श लिया जाना चाहिए।
धूम्रपान की वजह से सेल म्यूटेशन (कोशिका उत्परिवर्तन) होता है और इसके कारण लंग्ज (फेफड़ों का) कैंसर होता है। तम्बाकू में हानिकारक रसायन होते हैं जो सामान्य डीएनए संरचना को नुकसान पहुँचाने और म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) पैदा करने की क्षमता रखते हैं, और इन रसायनों को कार्सिनोजेन्स या कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ कहा जाता है। हालांकि शरीर में सेल मरम्मत की कई प्रक्रियाएं होती हैं, कुछ नुकसान की मरम्मत नहीं की जा सकती है और उन नुकसानों से सेल्स (कोशिकाओं) का अनियंत्रित रुप से विभाजन होने लगता है और अंततः ट्यूमर की उत्पत्ति होती है।
यह बहुत अच्छी तरह से प्रमाणित हुआ है कि धूम्रपान लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के सबसे बड़े प्रतिशत का कारण बनता है, और तंबाकू छोड़ने से लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के विकास के जोखिम को कम किया जा सकता है।
लंग्ज (फेफड़े के) कैंसर निदान करने के लिए चुनौतीपूर्ण कैंसर में से एक है क्योंकि यह प्रारंभिक अवस्था में कोई लक्षण नहीं दिखाता है। इसलिए, श्वास और छाती के क्षेत्र से संबंधित किसी भी लक्षण पर नज़र रखना महत्वपूर्ण है - यह विशेष रूप से अधिक जोखिम वाले लोगों के लिए सच है।
लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के उपचार से जुड़े संभावित दीर्घकालिक दुष्प्रभावों में सांस लेने में कठिनाई, लंग्ज (फेफड़ों) की कार्यप्रणाली में समस्या, जलन, लंबे समय तक सूजन आदि शामिल हैं। हालांकि, कुछ दवाओं और जीवन शैली की आदतों में बदलाव की मदद से इन दुष्प्रभावों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है।
एचसीजी में, हम केवल उस उपचार की सफलता ही परवाह नहीं करते हैं; बल्की हमारे डॉक्टर मरीज़ों को जीवन की बेहतर गुणवत्ता प्रदान करने में मदद करने का भी प्रयास करते हैं। हमारे उपचार के दृष्टिकोण व्यक्तिगत और मरीज़-केंद्रित होते हैं; ये दृष्टिकोण हमें उपचार के दौरान और उपचार के बाद में हमारे मरीज़ों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो यह सुनिश्चित करने में मदद करते हैं ।
हालांकि लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर को रोकने के कोई निश्चित तरीके उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी कुछ उपाय हैं जो आप अपने लंग्ज (फेफड़ों के) कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए कर सकते हैं :